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Chher-Chhera Doha - Cg Festival

सरसो फूले घमाघम भैया
मुनगा फूले सफेद रे,

बालक पन में केंवरा बधेंव
जवानी पन में भेंट रे।

सबके डउकी रिंगी चिंगी
मोर डउकी कुसवा रे

दू पइसा के डउकी लानेंव
उहू ल लेगे मुसवा रे।

ए पार नंदि ओ पार नंदि
बीच म कोदो खरही ग,
जाग-जागे सुतले बबा
तोर डोकरी हरही ग।

बात-बात म बात बाढ़े
पानी म बाढ़े धान,

तेल फूल म लइका बाढ़े
फोही म बाढ़े कान।

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कोलकी-कोलकी बइला चराएंव
बइला के सींग म माटी

ठाकुर घर जोहारे ल गेंव
बुचवा हाड़ी म बासी

छेंकत रहेंव बइला भइया
चढ़ परेंव भांड़ी

भांड़ी ले कुद के भागेंव
त पाएंव जुच्छा हांड़ी।
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छेरछेरा दाई छेरछेरा ....
कोठी के धान ला हेरतेच हेरा .....

Happy Chher-Chhera Fariends.
Jai Chhattisgarh.
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